मनोविज्ञान

आज हम समझने वाले हैं

  • मनोविज्ञान क्या है?
  • मनोविज्ञान का अर्थ
  • मनोविज्ञान की विधियां
  • मनोविज्ञान की आवश्यकता

मनोविज्ञान क्या है?

मनोविज्ञान वह शाखा है जो मानसिक प्रक्रियाओं, भावनाओं, विचारों, व्यक्तिगतता, और व्यवहार का अध्ययन करता है। यह विज्ञान प्राणी के भीतर के मानसिक प्रक्रियाओं की गहराईयों में जाता है और व्यक्ति के व्यवहार के पिछले कारणों को समझने का प्रयास करता है। मनोविज्ञान मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक व्यवहार के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

मनोविज्ञान न केवल मानवों के व्यवहार को समझने में मदद करता है, बल्कि पशु-पक्षीयों के व्यवहार और मानसिकता की भी अध्ययन करता है। यह विज्ञान विभिन्न मानसिक रोगों के कारणों की खोज में भी सहायक है और उनके उपचार की दिशा में नई दिशा दिखाता है।

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मनोविज्ञान का अर्थ

मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो मानसिक प्रक्रियाओं, अनुभवों, और विभिन्न संदर्भों में व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार का अध्ययन करता है। यह विज्ञान मानव मनोबल, भावनाएं, और सोचने-समझने की प्रक्रियाओं की गहराईयों में जाता है, और व्यक्ति के व्यवहार के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली रीढ़ियों को समझने का प्रयास करता है।

मनोवैज्ञानिकों द्वारा मनोविज्ञान का अर्थ  निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है _

“मनोविज्ञान, वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है।”

वुडवर्थ

” मनोविज्ञान मानव–व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है।”

क्रो एण्ड क्रो

“मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभव का अध्ययन हैं।”

स्किनर

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान किसी जीवित प्राणी के व्यवहार अनुभव व उसके वातावरण व भावों के मध्य सम्बंध का अध्ययन करता है |

मनोविज्ञान की विधियां

जैसा कि हमने पूर्व में बताया कि मनोविज्ञान मानव के व्यवहार का अध्ययन है अस्तु उसके व्यवहार के अध्ययन हेतु निम्न विधियों का प्रयोग किया जा सकता है –

  • 1. **सर्वेक्षण (Surveys):** मानसिक स्वास्थ्य विकारों के प्रसार और कारणों का अध्ययन करने के लिए सर्वेक्षण का प्रयोग किया जा सकता है।
  • 2. **केस स्टडी (Case Study):** यह एकल व्यक्ति, समूह, घटना या समुदाय के गहरे अध्ययन का परीक्षण करता है, जिससे उनके व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को समझा जा सकता है।
  • 3. **प्रयोगशील अध्ययन (Experimental Study):** यह एक प्रकार की आंकिक पद्धति है जिसमें एक परिणामस्वरूप संबंध की जाँच की जाती है।
  • 4. **सामग्री विश्लेषण (Content Analysis):** इसमें विचार किया जाता है कि मरीज कैसे लिखते हैं और उनके शब्दों और भाषा का विश्लेषण करने के लिए कैसे उपयुक्त हो सकता है।
  • 5. **मेटा-विश्लेषण (Meta-Analysis):** यह प्रकाशित अध्ययनों की प्राथमिकता से मिलकर सामान्य डेटा का एक संग्रहण तैयार करने की प्रक्रिया है।
  • 6. **संबंधात्मक अध्ययन (Correlational Research):** यह दो चरित्रित चर्चाओं के बीच संबंधों का मापन करने का प्रक्रियात्मक विधान है।
  • 7. **क्वासी-प्रयोग (Quasi-Experiment):** यह एक प्रकार की प्रयोगशील पद्धति है जिसमें अनुसंधानात्मक समूहों को स्वाभाविक गुणों के आधार पर विभाजित किया जाता है।
  • 8. **प्राकृतिक अवलोकन (Naturalistic Observation):** यह मरीज के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उपयुक्त होता है जब मरीज अपने प्राकृतिक परिसर में होते हैं।

मनोविज्ञान की आवश्यकता क्यों है

मनोविज्ञान का अध्ययन आवश्यक है क्योंकि यह हमें मानसिक और भावनात्मक प्रक्रियाओं की समझ प्रदान करता है। यह शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद करता है और समयानुसार व्यवहार की समझ में मदद करता है। मनोविज्ञान व्यक्तिगत विकास, सामाजिक आपसी संबंधों को मजबूती प्रदान करता है, जो एक समृद्ध और संतुलित जीवन की नींव होती है। इससे हम अपने अन्तरात्मा की गहरी समझ प्राप्त कर सकते हैं और अपने दिनचर्या में सुधार कर सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य का सही समझना और उसका संरक्षण करना जीवन की सफलता और खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, मनोविज्ञान के अध्ययन का महत्व अत्यधिक है और हमें अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिए इसका सही दिशा में उपयोग करना चाहिए।

मनोविज्ञानी विशेषज्ञ विभिन्न शोध और अध्ययनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। यह विज्ञान मानव बेहवियर को समझकर समाज में सहायक है और सही दिशा में विकसिती की ओर ले जाता है। इसलिए, मनोविज्ञान का अध्ययन न केवल व्यक्ति के भविष्य को सफल बनाने में मदद करता है, बल्कि समाज की सामाजिक संरचना में भी सुधार करने में मदद करता है।

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