मध्य प्रदेश राजनीति को निर्धारित करने वाले तत्व

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मध्य प्रदेश राजनीति को निर्धारित करने वाले तत्व आगामी बिंदु के माध्यम से समझा जा सकते हैं

प्रस्तावना

मध्य प्रदेश एक भू आवेष्ठित प्रदेश है जो भारत के मध्य में स्थित है । मध्य प्रदेश में राजनीतिक दृष्टि से विधानसभा की कुल 230 सीटे हैं तथा हमारे मध्य प्रदेश से 40 सदस्य संसद सदस्य हेतु भेजे जाते हैं । जिसमें से लोकसभा के 29 सदस्य तथा राज्यसभा के 11 सदस्य होते हैं ।

किसी राज्य के प्रमुख को संवैधानिक प्रमुख को राज्यपाल कहते हैं वर्तमान मध्य प्रदेश के राज्यपाल महोदय श्री मंगुभाई पटेल हैं।इस प्रकार किसी राज्य के कार्यकारी प्रमुख को मुख्यमंत्री कहते हैं तथा वर्तमान में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय मोहन यादव जी हैं जो भाजपा सरकार के सदस्य है ।

राजनीतिक दालों के संदर्भ में मध्य प्रदेश में सामान्यतः दो बड़े दल सक्रिय रहते हैं जो क्रमशः भाजपा व कांग्रेस हैं ।वर्तमान भाजपा सरकार मध्य प्रदेश में पदस्थ हैं ।

मध्य प्रदेश के संवैधानिक तत्व 

मध्य प्रदेश राजनीति को निर्धारित करने वाले संवैधानिक तत्व : भारत का संविधान एक लिखित संविधान है । लिखित संविधान का पालन सभी राज्यों में किया जाता है।भारत संघात्मक शासन व्यवस्था को अपनाता है । संघात्मक शासन व्यवस्था में केंद्र व राज्य साथ में मिलकर कार्य करते हैं किंतु संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत केंद्र को राज्य से अधिक शक्तिशाली बनाने का प्रयत्न किया गया है । भारतीय संविधान में उल्लेखित अनुच्छेद 352 , 354 , 360 जो क्रमशः राष्ट्रीय आपातकाल, राज्य आपातकाल 354, वित्तीय आपातकाल 360 हैं । यह राष्ट्रपति शासन से संबंधित है जिसमें हमारा भारत एकात्मक शासन की भांति व्यवस्थित किया जाता है । जिससे भारत की अखंडता को सुनिश्चित किया जा सके । 

संविधान की अनुसूची 7 में केंद्र व राज्यों के मध्य शक्ति का विभाजन किया गया है । शक्तियों का विभाजन तीन आधार पर किया गया है जो क्रमशः प्रशासनिक शक्ति , विधा शक्ति व वित्तीय शक्ति है । 

अनुच्छेद 360 के दौरान जब वित्तीय आपातकाल आता है तब वित्तीय शक्ति सम्पूर्ण केंद्र के ऊपर आपतित हो जाती है । इस प्रकार इन अनुच्छेदों में भी केंद्र की प्रभुत्व को अधिक बनाया गया है । इस प्रकार क्योंकि मध्य प्रदेश भी एक राज्य है तो इसकी प्रशासनिक विधि व वित्तीय शक्तियां केंद्र से प्रभावित होती है । 

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भौगोलिक तत्व 

भौगोलिक तत्व के अंतर्गत हम किसी प्रदेश की भूमि तथा उसके प्राकृतिक संसाधन जैसे नदी , खनिज , वन पशु संपदा आदि का अध्ययन करते हैं । यही भौगोलिक तत्व किसी प्रदेश की आर्थिक विकास के निर्धारक होते हैं ।

 प्रदेश की जनसंख्या का इन प्राकृतिक संसाधनों के साथ सीधा संपर्क होता है जिससे वह जनसंख्या प्रदेश के आर्थिक विकास को प्रभावित करती है । इसके अतिरिक्त मानव संसाधन का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है । जिस प्रदेश की जनसंख्या में जितना अधिक मानव संसाधन होता है उसका विकास उतनी ही तीव्र गति से होता है ।

मध्य प्रदेश राजनीति को निर्धारित करने वाले भौगोलिक तत्व मध्य प्रदेश भूगोल के हिसाब से भारत के मध्य में स्थित है अस्तु यह एक भू अवस्थित प्रदेश है । जनगणना 2011 के हिसाब से मध्य प्रदेश की जनसंख्या 7.26 करोड़ हैं । मध्य प्रदेश में प्राकृतिक संपदा के हिसाब से लगभग 41 नदियां बहती है । यहां खनिज संसाधन की दृष्टि से कोयला , मैगनीज , हीरा आदि खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । जनगणना 2011 के अंतर्गत के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 69% जनसंख्या शिक्षित है इस प्रकार मानव संसाधन का प्रतिशत मध्य प्रदेश में कम है । किसी राज्य की आर्थिक स्थिति भी राज्य में उपस्थित वित्त पर निर्भर करती है तथा वित्तीय सहायता हेतु मध्य प्रदेश राज्य पर निर्भर है ।

राजनीतिक तत्व

किसी भी प्रदेश के राजनीतिक तत्व को निम्न तीन बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है –

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केंद्रीय नेतृत्व 

 भारत में कार्यकारी प्रमुख प्रधानमंत्री होता है । अस्तु प्रधानमंत्री या संपूर्ण भारत के द्वारा जो योजनाएं क्रियान्वित की जाएगी वे सभी राज्य पर लागू होगी । इसी प्रकार केंद्र के द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता , सार्वजनिक कार्यक्रम , कानून विधि व अन्य प्रत्यक्ष रूप से राज्य पर लागू किए जाते हैं । 

किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है जो की केंद्र की परिधि के अंतर्गत आता है । केंद्रीय नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य पर होता है केंद्र में जितने अधिक प्रभावी शक्ति कार्यरत रहेगी उतना ही राज्य में विकास होता है । 

मध्य प्रदेश राजनीति को निर्धारित करने वाले इस तत्व के अनुसार इस प्रकार सामान्य या स्थिति देखी गई है यदि केंद्र में एक सरकार का प्रभाव है तो केंद्र अधिक शक्तिशाली होता है किंतु यदि केंद्र में गुटबंदी का प्रभाव होता है गुट्टाबंदी का प्रभाव हैं तो केंद्र की शक्ति क्षीण होती है तथा वह अपना कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पाता । वर्तमान में भाजपा सरकार केंद्र में प्रभावी है । अतः यह सरकार गुट बंदी से मुक्त है ।

मुख्यमंत्री का व्यक्तित्व

 यदि किसी राज्य का मुख्यमंत्री प्रभावी व्यक्तित्व का नहीं है तो वह राज्य के राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ उसके संपदा का भरपूर उपयोग नहीं कर पाया अस्तु उस राज्य का विकास नहीं हो पाता है । इसके विपरीत यदि मुख्यमंत्री प्रभावित व्यक्ति प्रभावी व्यक्तित्व का होता है तो वह अपने राज्य में उपस्थित मानव संसाधन , भौगोलिक संपदा आदि का सदुपयोग कर राज्य का विकास चहुमुखी रूप से कर सकता है 

राज्य की दलीय स्थिति 

ऐसा सामान्यतः स्थिति में देखा गया है कि यदि केंद्र व राज्य में समान दल पदस्थ होते हैं तो व्यवस्था सरल गति से चलती है । किंतु यदि केंद्र व राज्य में दाल विपरीत या अलग-अलग होते हैं तो वह प्रभावी रूप से अपना कार्य करने में असमर्थ होते हैं क्योंकि वह अपनी क्योंकि उनके विचार व कार्य करने का विधि अलग-अलग होती है। वह एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप करते रहते हैं ।

सामाजिक व सांस्कृतिक तत्व 

सामाजिक तत्व के अंतर्गत वर्ग , धर्म व जाति को रखा जाता है । जबकि सांस्कृतिक तत्व सामाजिक तत्व से परिलक्षित होते हैं । किसी धर्म व जाति में जिस प्रकार के रीति रिवाज ,परंपरा , प्रथाएं , मूल्य , मान्यताएं विद्यमान होती है वह ही उसके सांस्कृतिक तत्व कहते हैं कहे जाते हैं ।

मध्य प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले इस तत्व  अनुसार प्रदेश की 90% जनसंख्या हिंदू धर्म से संबंधित है अस्तु यहां पर RSS आरएसएस , बजरंग दल व एबीवीपी जैसे दल देखें गए हैं जो हिंदुत्व को बढ़ावा देते हैं । राजनीति भी इन सामाजिक दलों से प्रभावित होती है क्योंकि राजनीति का प्रमुख कार्य जनसंख्या का सामाजिक विकास करना है अस्तु राजनीति उसे समाज के मूल्य का समर्थन करने वाली होना चाहिए । राजनेता एक तरफ अपने स्वार्थ हेतु किसी एक धर्म को अधिक तवज्जो देता है तो वहीं दूसरी ओर अधिक जनसंख्या के लाभ के लिए किसी एक विशेष धर्म को विकसित किया जाता है ।

किसी राज्य में कितने अधिक शिक्षित व्यक्ति होते हैं उतना अधिक मानव संसाधन होता है । किसी राज्य में उपस्थित जनसंख्या का राजनीति से जितना अधिक संबंध या रुचि होती है राजनीति उतनी अच्छी या प्रभावी मानी जाती है । इसके विपरीत यदि जनसंख्या राजनीति के प्रति उदासीन होती है तो राजनेता भी स्वार्थ सिद्धि के लिए ही अपने पद का उपयोग करते हैं । इसके अतिरिक्त संपूर्ण भारत में विद्यमान सामाजिक व सांस्कृतिक तत्व भी राज्य को प्रभावित करते हैं , क्योंकि केंद्र की नीतियां व कानून राज्य पर लागू होते हैं इस प्रकार केंद्र का हस्तक्षेप न केवल राजनीति अपितु सामाजिक व सांस्कृतिक तत्व को भी प्रभावित करता है ।

आर्थिक तत्व आर्थिकतत्व 

किसी राज्य में उपस्थित भौगोलिक संपदा के साथ-साथ मानव संसाधन आर्थिक तत्व की निर्धारक होते हैं । इसके साथ ही केंद्र का हस्तक्षेप की आर्थिक तत्व को प्रभावित करता है क्योंकि राज्य अपने वित्त के लिए केंद्र पर आश्रित होता है । प्रदेश में उपस्थित भौगोलिक संपदा से उद्योग निर्माण तथा इसके पश्चात भी निर्माण की प्रक्रिया की जाती है । मध्य प्रदेश के संदर्भ में संपूर्ण जीडीपी का केवल 20% ही उद्योग से प्राप्त होता है और आश्चर्य की बात यह है कि मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या का केवल 5% लोग ही उद्योग करते हैं इस प्रकार मध्य प्रदेश विकासशील राज्य के अंतर्गत आता है ।

निष्कर्षित : उपरोक्त तत्व मध्य प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करते हैं । तथा मध्य प्रदेश की राजनीति को अन्य राजनीतिक राज्यो की प्रवृत्ति से अलग करते हैं ।

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