LANGUAGE ACROSS CURRICULUM

आज हम इस लेख में भाषा में पाठ्यक्रम विषय के निम्न प्रश्न उत्तर को समझेंगे

  1. पाठ्यक्रम में भाषा” यह क्या होता हैं ?
  2. भाषा से आप क्या समझते हो ? भाषा की परिभाषा और महत्व पर प्रकाश डालिए ।
  3. वृतांत विधि से आप क्या समझते हैं ? वृतांत विधि की विशेषताएं व सावधानियां लिखिए।
  4. स्कैनिंग और स्कीमिंग क्या है ?इन दोनों में अंतर स्पष्ट करो।सामूहिक गतिविधि से आप क्या समझते हो?
  5. सामूहिक गतिविधि से आप क्या समझते हो?
  6. सामूहिक काल्पनिक पठन से आप क्या समझते हो ? सामूहिक काल्पनिक पठान करते समय क्या सावधानियां रखना चाहिए?
  7. सामूहिक चर्चा से आप क्या समझते हो ? इसके उद्देश्य विशेषताएं उपयोग व सावधानियां क्या हैं ?

1.“पाठ्यक्रम में भाषा” यह क्या होता हैं?

LANGUAGE ACROSS CURRICULUM “पाठ्यक्रम में भाषा” का अर्थ होता है कि किसी कक्षा या विषय के पाठ्यक्रम में भाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। इसका मतलब है कि विद्यार्थियों को संचार करने, समझने, पढ़ने, और लिखने के कौशलों को विकसित करने के लिए भाषा का सही उपयोग किया जाता है। यह उन्हें सही तरीके से विचार करने और अभिव्यक्ति करने की क्षमता प्रदान करता है। भाषा पाठ्यक्रम में समावेशित किए जाने वाले विभिन्न विषयों में शामिल किए जा सकते हैं, जैसे कि हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, आदि।

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2.भाषा से आप क्या समझते हो ? भाषा की परिभाषा और महत्व पर प्रकाश डालिए ।

भाषा एक संवाद का माध्यम है जिसका उपयोग लोग विचार, भावनाएँ, और ज्ञान साझा करने के लिए करते हैं। यह शब्दों, वाक्यों, और विचारों के संरचना, अर्थ, और उच्चारण के अंशों का अध्ययन है। भाषा के माध्यम से लोग एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं, विचार व्यक्त करते हैं, और ज्ञान प्राप्त करते हैं। भाषा की महत्वपूर्ण विशेषताएँ शब्दों का अर्थ, व्याकरण, और संवाद का संरचना शामिल हैं।

भाषा का महत्व

भाषा का महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह हमारी सोचने, संवाद करने, समझने, पढ़ने, और लिखने की क्षमता को प्रभावित करती है। सही भाषा का सही तरीके से उपयोग हमें अपने विचारों और भावनाओं को दूसरों के साथ साझा करने में मदद करता है। यह सामाजिक और व्यावसायिक संवाद में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो सामाजिक समृद्धि और सांस्कृतिक समृद्धि में सहायता करता है। भाषा के माध्यम से ही हम विश्व को समझ सकते हैं और उससे जुड़ सकते हैं।

3.वृतांत विधि से आप क्या समझते हैं ? वृतांत विधि की विशेषताएं व सावधानियां लिखिए।

वृतांत विधि का मतलब है किसी घटना, वस्तु, विषय, स्थिति आदि की जानकारी देने के लिए उससे जुड़ी बातें बताना या उसका वर्णन करना. वृतांत लेखन को अंग्रेज़ी में संस्मरण लेखन कहते हैं. संस्मरण किसी पुरानी घटना का व्यक्तिगत अनुभव के साथ लिखा गया ऐतिहासिक विवरण होता है.

वृतांत के कुछ उदाहरण:
संस्मरण
व्यक्तिगत वृतांत (केस हिस्ट्री)
वर्ष-वृतांत
यात्रा-वृतांत
वर्ष-वृतांत का मतलब है प्रतिवर्ष लिखे जाने वाले वृतांत. रोम के इतिहास में, समकालीन लोगों द्वारा उस काल के बारे में प्रतिवर्ष लिखा जाने वाला वृतांत ‘वर्ष-वृतांत’ कहलाता था.
यात्रा-वृतांत किसी स्थान में बाहर से आए व्यक्ति या व्यक्तियों के अनुभवों के बारे में लिखा गया वृतांत होता है. इसका इस्तेमाल पाठक मनोरंजन के लिए या फिर उसी स्थान में स्वयं यात्रा करने के लिए जानकारी हासिल करने के लिए करते हैं.
इंटरनेट, टेलीविज़न, और रेडियो के आने से पहले यात्रा-वृतांत खास तौर पर अहम थे. किसी क्षेत्र की जानकारी हासिल करने का एकमात्र तरीका, खुद वहां जाने के अलावा, वहां मौजूद किसी व्यक्ति का विवरण पढ़ना या सुनना था. यात्रा-वृतांतों को कभी-कभी यात्रा साहित्य भी कहा जाता है।

वृतांत विधि की विशेषताएं

  • 1. **विवरणशीलता:** वृत्तांत विधि का मुख्य उद्देश्य किसी घटना, वस्तु, व्यक्ति, या स्थिति का विवरण देना है। इसमें घटना के संदर्भ, स्थान, समय, और परिस्थितियों का संपूर्ण वर्णन शामिल होता है।
  • 2. **संवादित परिस्थितियाँ:** यह वृत्तांत में संवादित बातचीत और वाक्यांशों के माध्यम से प्रस्तुत की जाने वाली बातें शामिल करता है। संवाद से पाठक घटना को और भी संवादशीलता से समझ सकता है।
  • 3. **रंगीन भाषा और चित्रात्मक वर्णन:** वृत्तांत में रंगीन भाषा का प्रयोग और चित्रात्मक वर्णन करके घटना को जीवंत बनाया जाता है, ताकि पाठक उसे सहजता से समझ सकें।
  • 4. **पाठकों की रुचि को ध्यान में रखना:** वृत्तांत में विभिन्न प्रकार की रुचियों को ध्यान में रखकर उच्चारण, शैली, और संवाद का चयन किया जाता है ताकि पाठकों का ध्यान पूरी तरह से रखा जा सके।
  • 5. **समावेशी और संवेदनशील भाषा:** वृत्तांत में समावेशी और संवेदनशील भाषा का प्रयोग किया जाता है ताकि पाठक घटना की भावना को समझ सकें और उसमें सहभागी भावना विकसित कर सकें।

वृतांत की सावधानियां

  • 1. **संवादित और वास्तविकता:** वृत्तांत में संवादित भाषा का प्रयोग करने से घटना को जीवंत और वास्तविक बनाए रखना चाहिए।
  • 2. **सही तारीक़ और स्थान:** वृत्तांत में घटना के सही समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
  • 3. **भावनात्मक संवेदनशीलता:** पाठकों को घटना की भावनाओं को समझने में मदद करने के लिए भावनात्मक संवेदनशीलता के साथ लेखन करना चाहिए।
  • 4. **संवेदनशील भाषा:** संवेदनशील भाषा का प्रयोग करके पाठकों की भावनाओं को सही तरीके से समझाया जा सकता है।
  • 5. **संगीतमयता और फ्लो:** वाक्यों की संगीतमयता और फ्लो को बनाए रखना चाहिए ताकि पाठक आसानी से समझ सकें और पढ़ने में मन लगा सकें।
  • 6. **संक्षिप्तता:** वृत्तांत को संक्षेप में पेश करना चाहिए, ताकि पाठकों का ध्यान बना रहे और वे पूरी कहानी समझ सकें।
  • 7. **स्पष्टता:** वृत्तांत को स्पष्ट और सही भाषा में लिखना चाहिए ताकि पाठक सही समझ सकें। इन सावधानियों का पालन करते हुए वृत्तांत लिखना आपके पाठकों को समझने में मदद करेगा और पठनीयता को बढ़ाएगा।

4.स्कैनिंग और स्कीमिंग क्या है ?इन दोनों में अंतर स्पष्ट करो।

स्कैनिंग (Scanning) और स्कीमिंग (Skimming) दो पढ़ाई की तकनीकें हैं:

  1. स्कैनिंग (Scanning): स्कैनिंग का मतलब होता है दिए गए पाठ में किसी विशेष जानकारी, शब्द, या विचार की खोज करना। पाठ को ठीक से समझने के लिए पढ़ने के पहले, पाठ में उपस्थित विशेष बिंदुओं को खोजने की तकनीक स्कैनिंग कहलाती है।
  2. स्कीमिंग (Skimming): स्कीमिंग का मतलब है पाठ की सारी बातों को तेजी से पढ़ना और उसमें से मुख्य जानकारी या मुख्य बिंदुओं को समझना। स्कीमिंग का उद्देश्य पाठ की मुख्य बातों को संक्षेप में समझना होता है, जिससे पाठक विषय की सारी प्रमुख जानकारी प्राप्त कर सके।

स्कैनिंग स्कीमिंग में अंतर

स्कैनिंग में दिए गए पाठ में किसी विशेष जानकारी, शब्द, या विचार की खोज की जाती हैं। पाठ को ठीक से समझने के लिए पढ़ने के पहले, पाठ में उपस्थित विशेष बिंदुओं को खोजने की तकनीक स्कैनिंग कहलाती हैं जबकि स्कीमिंग में पाठ की सारी बातों को तेजी से पढ़ना और उसमें से मुख्य जानकारी या मुख्य बिंदुओं को समझते हैं। स्कीमिंग का उद्देश्य पाठ की मुख्य बातों को संक्षेप में समझना होता है, जिससे पाठक विषय की सारी प्रमुख जानकारी प्राप्त कर सके।

इन तकनीकों का प्रयोग पठनीयता को बढ़ाने और समय की बचत करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण: बच्चे का स्कैनिंग और स्कीमिंग:

  1. स्कैनिंग (Scanning):
  • स्कैनिंग का मुख्य उद्देश्य यहाँ जल्दी से जल्दी खोज करना है।
  • बच्चा स्कैनिंग करके खेल के सामग्री में से अपनी पसंदीदा खिलौना ढूंढता है, जैसे कि “मेरी पसंदीदा खिलौना कहाँ है?”
  1. स्कीमिंग (Skimming):
  • स्कीमिंग का मुख्य उद्देश्य यहाँ मुख्य बातें तेजी से समझना है।
  • बच्चा स्कीमिंग करके किताब के प्रमुख खासियतों को समझता है, जैसे कि “इस कहानी में राजा-रानी थे और एक जादुई किताब थी।”

इस उदाहरण में, बच्चा स्कैनिंग के जरिए विशेष खिलौना और स्कीमिंग के जरिए किताब की मुख्य जानकारी को समझता है।

5.सामूहिक गतिविधि से आप क्या समझते हो?

सामूहिक गतिविधि वह गतिविधि जिसमें एक समूह में लोग मिलकर किसी कार्य या परियोजना को संपन्न करने के लिए सहयोग करते हैं। इससे सामूहिक सामर्थ्य, सामूहिक उत्साह, और टीमवर्क कौशल विकसित हो सकते हैं। इससे लोग सामूहिक रूप से सीख सकते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर समाधान निकाल सकते हैं। यह सामूहिक गतिविधियाँ स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों, और समुदायों में आम होती हैं और सामूहिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कार्यकर्ताओं को एक साथ लाती हैं।

एक सामूहिक गतिविधि का उदाहरण यह हो सकता है कि एक विशेष विषय पर विचार-विमर्श करना–

एक समुदाय सेवा अभियान का आयोजन किया जा सकता है, जिसमें समुदाय के लोग एक साथ मिलकर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं और समाज के लाभ के लिए कदम उठाते हैं। इस गतिविधि में समुदाय के सदस्य सहयोग से एक साथ काम करते हैं और उनकी बातचीत में नए और सामाजिक विचार प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार की सामूहिक गतिविधि समुदाय को सामाजिक समस्याओं पर विचार करने और समाधान निकालने के लिए समर्थ बनाती है।

6.सामूहिक काल्पनिक पठन से आप क्या समझते हो ? सामूहिक काल्पनिक पठन करते समय क्या सावधानियां रखना चाहिए?

“सामूहिक काल्पनिक पठन” का अर्थ होता है किसी समूह में कथनात्मक कल्पनाओं और अद्वितीय विचारों की विकसित कौशल का उपयोग करना। यह समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से एक काल्पनिक कथा या संस्कृति का परिचय देता है, जिससे सामूहिक रूप से नई और रूचिकर पठन विकसित किया जा सकता है। इस प्रकार की पठन विधि समूह के सदस्यों की रचनात्मकता और सहयोगी भावना को प्रोत्साहित करने का कारण बनती है।

एक सामूहिक काल्पनिक पठान का उदाहरण यह हो सकता है कि कुछ बच्चे मिलकर एक कहानी या नाटक का कल्पनिक संस्कृति बनाते हैं:

**उदाहरण: “खोजी यात्रा”**

एक समूह बच्चों ने मिलकर “खोजी यात्रा” कहानी बनाई। इस कहानी में वे सभी एक खोजी समूह के सदस्य हैं जो एक पुराने हवेली की खोज में निकलते हैं। हवेली में छुपी सुरों की पहेलियों को हल करने के लिए उन्हें विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सभी बच्चे नाटक की विभिन्न सीनों को रचते हैं, जैसे कि हवेली के दरवाजे का खुलना, उनकी खोजी यात्रा, और सुरों की पहेलियों का समाधान।इस सामूहिक काल्पनिक पठान में, बच्चे सहयोग से मिलकर कहानी की नई और रोचक दृष्टिकोन विकसित करते हैं, जो उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देती है। इससे वे एक-दूसरे के सोचने की क्षमता को विकसित करते हैं और सामूहिक रूप से काम करने के लिए प्रेरित होते हैं।

सामूहिक काल्पनिक पठन करते समय निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए

  • 1. **समूह की समर्थन क्षमता:** समूह में सभी सदस्यों की समर्थन क्षमता को मध्यस्थता द्वारा सुनिश्चित करें। यह सहायता करेगा कि समूह की सामूहिकता बनी रहे।
  • 2. **संवेदनशीलता और समर्थन:** सभी सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करें और उनकी संवेदनशीलता को महत्वपूर्ण मानें।
  • 3. **संवेदनशील विषयों का संज्ञान:** संवेदनशील या विवादास्पद विषयों के संज्ञान में सतर्क रहें और समूह के सदस्यों के बीच संवाद को नेतृत्व प्रदान करें।
  • 4. **संवेदनशील सामग्री का चयन:** संवेदनशील सामग्री का चयन करते समय समूह की आयु और सामूहिकता को ध्यान में रखें। सामग्री को समूह के सदस्यों की समझ में आनी चाहिए।
  • 5. **संरचनित प्रस्तुति:** संरचित और स्पष्ट प्रस्तुति की संरचना तैयार करें, जिससे कि समूह के सदस्य सहजता से समझ सकें और सामूहिक कार्य में सहयोग कर सकें।
  • 6. **प्रतिक्रिया का स्वागत:** सभी सदस्यों की प्रतिक्रिया का स्वागत करें और उनकी सुझावों का महत्वपूर्ण रूप से विचार करें।इन सावधानियों का पालन करते हुए समूहिक काल्पनिक पठन संवेदनशीलता और सहयोग में मदद कर सकता है, जिससे समूह के सदस्य सहयोगी भावना में काम कर सकते हैं।

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7.सामूहिक चर्चा से आप क्या समझते हो ? इसके उद्देश्य विशेषताएं उपयोग व सावधानियां क्या हैं ?

सामूहिक चर्चा , यह एक प्रकार की चर्चा है जो समूह के सदस्यों के बीच में संपन्न की जाती है। इसके उद्देश्य, विशेषताएं, उपयोग और सावधानियां निम्नलिखित रहती हैं:

उद्देश्य

  • 1. **विचार-विमर्श:** सामूहिक चर्चा का मुख्य उद्देश्य विचारों, विचार-मतों, और नई विचारधाराओं को साझा करना और उन पर विचार करना होता है।
  • 2. **समाधान:** समस्याओं के संदर्भ में सामूहिक चर्चा से समाधान निकलने का प्रयास किया जा सकता है।
  • 3. **ज्ञान साझा करना:** समूह के सदस्यों के बीच में ज्ञान और अनुभव साझा करने का एक माध्यम होती है।
  • 4. **सामूहिक सहमति:** सामूहिक चर्चा से सदस्यों के बीच में सामूहिक सहमति प्राप्त की जा सकती है, जिससे सामूहिक कार्रवाई की दिशा में निर्णय लिया जा सकता है।

**विशेषताएं:**

  • 1. **संपादन मानक:** सामूहिक चर्चा में संवेदनशीलता और समर्थन की संपादन मानक का पालन किया जाता है।
  • 2. **संरचनित विचार-मत:** सामूहिक चर्चा में संरचित विचार-मत का पालन किया जाता है ताकि चर्चा संवेदनशील और सामूहिक रूप से सही दिशा में जाए।

**उपयोग:**

  • 1. **विभिन्न विचार-मतों का अध्ययन:** सामूहिक चर्चा से विभिन्न विचार-मतों का अध्ययन किया जा सकता है और उनका विश्लेषण किया जा सकता है।
  • 2. **विचार-मतों का मूल्यांकन:** सामूहिक चर्चा से विचार-मतों का मूल्यांकन किया जा सकता है और उनकी महत्वता का पता लगाया जा सकता है।

**सावधानियां:**

  • 1. **समाधान की दिशा में सावधानी:** समाधान की दिशा में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि विचार-मतों का संविधान ठीक और सही हो।
  • 2. **समूहिक सहमति:** समूह की सहमति का महत्वपूर्ण होना चाहिए ताकि अच्छा और संवेदनशील समाधान निकला जा सके।

इन तत्वों का पालन करते हुए सामूहिक चर्चा उपयुक्त और सही दिशा में जा सकती है, जिससे समूह के सदस्यों के बीच सहयोगी और समर्थ विचार विकसित हो सकते हैं।

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